श्री गोदावरी गिरी महाराज

सर्वजनहिताय सर्वजनसुखाय मानवजन कल्याण सेवा समिति

आप श्री आचार्य चन्द्र शेखर त्रिपाठी शिष्य श्री गोदावरीगिरी महाराज, आपने अपनी शास्त्री की उपाधी सम्पूर्णानन्द संस्कृत महाविद्यालय वाराणसी से, तथा कथा अध्ययन वृन्दावन में श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर जी के सानिध्य में किया.

आप एक उच्च कोटि के कथावाचक, कालसर्प योग विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, नाड़ी शोधन ज्ञाता, ज्योतिष परामर्शक हैं.

आप श्रीमद भागवत पुराण, श्री देवी भागवत पुराण, शिव पुराण, हरिवंश पुराण, नारद पुराण, गणेश पुराण, राम कथा एवं गौ कथा के उच्च कोटि के व्याख्या कर्ता हैं.

Read More

श्रीमद भागवत कथा

Shrimad_Bhagwat_Katha1

कल्याण की इच्छा वाले मनुष्यों को उचित है कि मोह का त्याग कर अतिशय श्रद्धा-भक्तिपूर्वक अपने बच्चों को अर्थ और भाव के साथ श्रीगीताजी का अध्ययन कराएँ। स्वयं भी इसका पठन और मनन करते हुए भगवान की आज्ञानुसार साधन करने में समर्थ हो जाएँ क्योंकि अतिदुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर अपने अमूल्य समय का एक क्षण भी दु:खमूलक क्षणभंगुर भोगों के भोगने में नष्ट करना उचित नहीं है। "गीताजी का पाठ आरंभ करने से पूर्व निम्न श्लोक को भावार्थ सहित पढ़कर श्रीहरिविष्णु का ध्यान करें-- "

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

Read More

गणेश पुराण

5th-post-featured

किसी भी पूजा-अर्चना या शुभ कार्य को सम्पन्न कराने से पूर्व गणेश जी की आराधना की जाती है। यह गणेश पुराण अति पूजनीय है। इसके पठन-पाठन से सब कार्य सफल हो जाते हैं।

पहला खण्ड - आरम्भ खण्ड

इस खंड में ऐसी कथाएं सूत जी ने सुनाई हैं जिससे हमेशा सब जगह मंगल ही होगा। सूत जी ने सबसे पहली कथा द्वारा बताया है कि किस प्रकार प्रजाओं की सृष्टि हुई और सर्वश्रेष्ठ देव भगवान गणेश का आविर्भाव किस प्रकार हुआ।आगे सूत जी ने शिव के अनेक रूपों का वर्णन किया है। वे कैसे सृष्टि की उत्पत्ति, संहार और पालन करते हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि विष्णु का एक वर्ष शिव के एक दिन के बराबर होता है।

Read More

काल सर्प योग विशेषज्ञ

कुंडली में सात गृह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि जब राहू और केतु के बीच स्थित होते है तो कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण होता है! मान लो यदि कुंडली के पहले घर में राहू स्थित है और सातवे घर में केतु तो बाकी के सभी गृह पहले से सातवे अथवा सातवे से पहले घर के बिच होने चाहिए! यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है की सभी ग्रहों की डिग्री राहू और केतु की डिग्री के बीच स्थित होनी चाहिए, यदि कोई गृह की डिग्री राहू और केतु की डिग्री से बाहर आती है तो पूर्ण कालसर्प योग स्थापित नहीं होगा, इस स्थिति को आंशिक कालसर्प कहेंगे !कुंडली में बनने वाला कालसर्प कितना दोष पूर्ण है यह राहू और केतु की अशुभता पर निर्भर करेगा मानव जीवन पर कालसर्प दोष का प्रभाव सामान्यता कालसर्प योग जातक के जीवन में संघर्ष ले कर आता है ! इस योग के कुंडली में स्थित होने से जातक जीवन भर अनेक प्रकार की कठिनाइयों से जूझता रहता है !और उसे सफलता उसके अंतिम जीवन में प्राप्त हो पाती है, .....

Read More